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Thursday, 26 January 2012

स्कूलों में नहीं होंगे सास-बहू के नाटक

Thursday, January 26, 2012
स्कूलों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों से सास एवं बहू के बीच तकरार दर्शाने वाले गाने और नाटक करवाने वालों की अब खैर नहीं होगी। ऐसा करना स्कूल प्रबंधन के सामने मुश्किल खड़ी कर सकता है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। सरकार ने स्कूलों में सास-बहू के रिश्तों में नकारात्मक प्रभाव डालने वाले नाटकों और गानों के मंचन पर रोक लगा दी है। सरकार का मानना है कि इस तरह के नाटकों से बच्चों खासकर लड़कियों में छोटी उम्र से ही रिश्तों के प्रति कड़वाहट पैदा हो जाती है। और यदि बच्चों की नींव में ही इस तरह के दुष्प्रभाव आ जाएंगे तो वह अच्छे नागरिक नहीं बन सकते।
मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने बालिका के अधिकार एवं असंतुलित लिंग अनुपात के दुष्प्रभाव पर आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय शिविर के शुभारंभ कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने प्रदेश के एक स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर छोटी-छोटी लड़कियां सास एवं बहू के बीच बढ़ रहे कड़वाहट भरे रिश्तों पर अभिनय कर रही थी। उनका मानना है कि इससे लड़कियों में बचपन में ही सास के प्रति दुष्प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। ऐसे में जब उसकी शादी होती है तो सास व बहू का रिश्ता लड़ाई का घर बन जाता है। प्रदेश में महिलाओं के प्रताड़ना की एक वजह ऐसी निम्न स्तर की शिक्षा भी है जो प्रदेश की बालिकाओं को स्कूल से ही प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इससे अच्छा है कि बच्चों को स्कूलों में देशभक्ति के गीत गाने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि उनमें देश के प्रति प्रेम की भावना विकसित हो।
उन्होंने साफ कहा कि भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम करवाने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा क यदि निजी स्कूलों में ऐसा होता है तो उन्हें मिलने वाली ग्रांट भी बंद की जा सकती है।
source:http://www.jagran.com/himachal-pradesh/shimla-8903068.html


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